भारतीय साहित्य अकादमी (Bharatiya Jnanpith), नई दिल्ली
उद्देश्य
भारतीय भाषाओं में साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित करना
भाषाएँ
भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में से कोई भी
राशि / पुरस्कार
₹11 लाख (नकद) + पदक + प्रशस्ति पत्र
प्रथम पुरस्कार विजेता
मकनलाल चतुर्वेदी (हिंदी, 1965)
वर्तमान पुरस्कार विजेता
2023 तक कुंवर नारायण (Hindi)
वार्षिक
पुरस्कार वार्षिक रूप से दिया जाता है (कभी-कभी विलंब भी होता है)
मुख्य पात्रता
भारतीय लेखक/कवि/साहित्यकार जिनका योगदान साहित्य में महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट हो
ज्ञानपीठ पुरस्कार – प्रमुख तथ्य
भारत का सबसे बड़ा साहित्यिक पुरस्कार माना जाता है।
यह पुरस्कार भारतीय भाषाओं के साहित्य को प्रोत्साहित करता है।
पुरस्कार की घोषणा भारतीय भाषाओं और साहित्य जगत में होती है।
पुरस्कार पाने वाले लेखक का योगदान सिर्फ एक ही किताब के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण साहित्यिक योगदान के लिए होता है।
चयन प्रक्रिया
भारतीय भाषाओं के लेखक/कवि की सिफ़ारिश की जाती है।
Jnanpith Selection Board में भाषा विशेषज्ञ और साहित्यकार शामिल होते हैं।
सर्वसम्मति या बहुमत से चयन किया जाता है।
पुरस्कार की घोषणा राष्ट्रपति या भारतीय साहित्य अकादमी के माध्यम से की जाती है।
प्रमुख ज्ञानपीठ विजेता (Representative List)
वर्ष
लेखक/कवि
भाषा
1965
मकनलाल चतुर्वेदी
हिंदी
1966
काजिनाथ
कन्नड़
1967
गिरिजाकुमार माथुर
हिंदी
1970
फणीश्वरनाथ रेणु
हिंदी
1975
हरिवंश राय बच्चन
हिंदी
1980
अमृता प्रीतम
पंजाबी
1985
मुनि शंकर अत्रे
मराठी
1990
धर्मवीर भारती
हिंदी
2000
राम विलास शर्मा
हिंदी
2010
के. एस. कृष्णमूर्ति
कन्नड़
2015
गुंजन सिंह
हिंदी
2023
कुंवर नारायण
हिंदी
Booker Prize
विशेष
विवरण
पूरा नाम
The Booker Prize (पूर्व में The Man Booker Prize)
स्थापना
1969
कौन देता है
Booker Prize Foundation, UK
उद्देश्य
उत्कृष्ट अंग्रेज़ी उपन्यास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना
भाषाएँ
केवल अंग्रेज़ी में प्रकाशित उपन्यास
पुरस्कार राशि
£50,000 (लगभग ₹50 लाख) + मान्यता/प्रशंसा
प्रथम पुरस्कार विजेता
P. H. Newby – Something to Answer For (1969)
पुरस्कार की घोषणा
हर साल अक्टूबर में की जाती है
मुख्य पात्रता
कोई भी लेखक जो अंग्रेज़ी में उपन्यास प्रकाशित करता है; पहले केवल ब्रिटिश या कॉमनवेल्थ के लेखक पात्र थे, अब कोई भी अंतरराष्ट्रीय लेखक पात्र है (2005 से)
प्रमुख तथ्य
Booker Prize को साहित्य में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक माना जाता है।
यह पुरस्कार अंग्रेज़ी साहित्य को प्रोत्साहित करता है।
विजेता उपन्यास के अलावा नॉमिनेटेड किताबों की शॉर्टलिस्ट भी बनती है, जो पुस्तक प्रेमियों और शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पुरस्कार का चयन साहित्य विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया जाता है।
प्रमुख Booker Prize विजेता (Representative List)
वर्ष
लेखक
किताब
1969
P. H. Newby
Something to Answer For
1970
Bernice Rubens
The Elected Member
1974
Nadine Gordimer
The Conservationist
1978
Iris Murdoch
The Sea, The Sea
1981
Salman Rushdie
Midnight’s Children
1997
Arundhati Roy
The God of Small Things
2008
Aravind Adiga
The White Tiger
2019
Margaret Atwood & Bernardine Evaristo
The Testaments & Girl, Woman, Other
2020
Douglas Stuart
Shuggie Bain
2021
Damon Galgut
The Promise
2022
Shehan Karunatilaka
The Seven Moons of Maali Almeida
2023
Paul Lynch
Prophet Song
साहित्य में महत्व
Booker Prize जीतना विश्व साहित्य में उच्च सम्मान का प्रतीक है।
पुरस्कार विजेता लेखक की किताबें अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेस्टसेलर बन जाती हैं।
यह पुरस्कार नवीन लेखक और established लेखक दोनों के लिए उपलब्ध है।
मेजर ध्यानचंद – Major Dhyan Chand
विशेष
विवरण
पूरा नाम
ध्यान सिंह चौधरी (ध्यानचंद)
जन्म
29 अगस्त 1905
जन्म स्थान
लखमपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
मृत्यु
3 दिसंबर 1979
मृत्यु स्थान
नई दिल्ली, भारत
उपनाम / खिताब
Hockey Wizard (हॉकी के जादूगर)
राष्ट्रिय पहचान
भारतीय हॉकी का राष्ट्रीय हीरो, जिसे सोन की छड़ी (Stick of Gold) कहा गया
मुख्य खेल
हॉकी (Field Hockey)
खेल उपलब्धियां
– 1928, 1932, और 1936 ओलंपिक में स्वर्ण पदक – कुल 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक (India Hockey Team)
सुधार और योगदान
हॉकी में विश्व स्तरीय कौशल और गोल बनाने की कला विकसित की; भारतीय हॉकी को विश्व में सर्वोच्च स्थान दिलाया
पुरस्कार
1956 – पद्म भूषण (भारत सरकार द्वारा), हॉकी के क्षेत्र में योगदान के लिए
स्मरण
– भारत सरकार ने Rajiv Gandhi Khel Ratna Award का नाम बदलकर Major Dhyan Chand Khel Ratna Award कर दिया है (2021) – राष्ट्रीय खेल दिवस भारत में 29 अगस्त को मनाया जाता है, ध्यानचंद के जन्मदिन पर
विरासत
कई स्टेडियम और हॉकी मैदान उनके नाम पर बने, हॉकी को बढ़ावा देने में उनका योगदान अमर है
महत्वपूर्ण तथ्य
मेजर ध्यानचंद को विश्व हॉकी का जादूगर माना जाता है।
उन्होंने भारत को हॉकी में अंतरराष्ट्रीय दबदबा दिलाया।
उनके 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक हॉकी के इतिहास में भारत की गौरव गाथा हैं।
उनका नाम खेल पुरस्कारों और राष्ट्रीय खेल दिवस में सदैव याद किया जाता है।